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नींद

July 03, 2018
【1】 जब भी किया नींद ने तेरे ख़्वाबों का आलिंगन और आँखों ने चूमा है तेरी ख़ुश्बू के लबों को तब मुस्कुरा उट्ठा है मेरे ज़िस्म का रोंया...Read More

दो नज़्में

June 23, 2018
तुम्हारी उलझी जुल्फों को सुलझाते हुए अक्सर, मन उलझ जाता है सुलझी हुई जुल्फों में... चित्र साभार- गूगल तन्हाई में आकर अचानक...Read More

तन्हाई के जंगल

April 25, 2018
तन्हाई के जंगल में  भटकते हुए  याद का पल जब भीग जाता है  अश्क़ों की बारिश में  तब एक उम्मीद  चुपके से आकर  पोछ देती है  ...Read More

अमरबेल की तरह

September 12, 2017
दिल के शज़र की इक शाख़ पे इक रोज़ रख दिया था बेचैनी ने तेरी याद का इक टुकड़ा और आज़ दिल के शजर की कोई शाख़ नहीं दिखती तेरी य...Read More

एहसास की डोलची

September 11, 2017
दिल के कमरे में अब पसर चुकी है वीरानी ख़्वाबों की अलमारी कब से पड़ी है खाली उम्मीदों की तस्वीरों ने खो दिए हैं रंग अपने आस की खिड़की ...Read More

इक तेरे जाने के बाद

September 06, 2017
हर शाम ग़मगीं सी हर सुबह उनींदी सी हर ख़्याल खोया सा इक तेरे जाने के बाद हर वक़्त बिखरा सा हर अश्क़ दहका सा एहसास भिगोया सा इक तेरे जा...Read More

शब्द बिखर जाते हैं

September 05, 2017
अक्सर शब्द बिखर जाते हैं कोशिश बहुत करता हूँ, कि शब्दों को समेट कर कोई कविता लिखूं पर ये हो नहीं पाता कोशिश बहुत करता हूँ कि एहसास समेट क...Read More

शायद तुम नहीं जानती

September 04, 2017
शायद तुम नहीं जानती मैंने रोक रक्खा है पलकों के भीतर आंसुओं के समंदर में  उठने वाले ज्वार को बनाकर यादों का तटबंध कुछ लहरें फ...Read More

सोया हुआ ज्वालामुखी

August 24, 2017
हलचल सी मची है उम्मीदों की बस्ती में गिरने लगे हैं तमन्ना के झुलसे हुये शजर  कुछ ही देर में ढाँक लेगा अहसास के आसमां को पिघले हुये ...Read More

छांव बेच आया है-क़तआत

July 23, 2017
चला शहर को तो वो गांव बेच आया है अजब मुसाफ़िर है जो पांव बेच आया है मकां बना लिया माँ-बाप से अलग उसने शजर ख़रीद लिया छांव बेच आया है...Read More

देश कहाँ है

July 19, 2017
इन दिनों देश में एक विचित्र सा वातावरण निर्मित हो गया है। लोगों और समुदायों का आपसी विरोध, देश विरोध तक जा पहुंचा है। इससे न देश में प्रतिक...Read More

औलाद का फर्ज़

July 02, 2017
नहीं अब तुम्हें नौकरी नहीं मिल सकती... ऐसा न कहो सेठ जी नौकरी न रही तो मैं और मेरा परिवार भूखा मर जायेगा...मुन्ना ने गिड़गिगते हुए चमन सेठ ...Read More

तुम कभी आओ तो

June 19, 2017
तुम कभी आओ तो मैं घुमाऊँ तुमको खण्डहर सी ज़िन्दगी के उस कोने में जहाँ अब भी पड़ीं हैं अरमानों की अधपकी ईंटें ख़्वाबों के अधजले टुकड़े...Read More

पतझड़ के बाद की बहार

June 16, 2017
शेष भाग... अपने कमरे पहुंच के मनु की आँखे नम हो गई। उसके कानों में बार-बार पापा की बात ही गूँज रही थी। उसने जैसे तैसे खुद को सयंत किया। ...Read More

पतझड़ के बाद की बहार

June 08, 2017
क्या हुआ इतना परेशान क्यों हो? अरे कुछ नहीं अरु, वो मेरा दोस्त है न प्रकाश उसकी बेटी ... क्या हुआ उसको? अरे हुआ कुछ नहीं, वो किसी लड़के क...Read More

आशाओं के दीप जलायें

June 07, 2017
निराशाओं के घोर तमस में आशाओं के दीप जलायें भावनाओं से उसे सींच कर अपनेपन का पेड़ लगायें अभिनंदित हो जहाँ भावना और प्यार से जग सुरभित ...Read More

पर्यावरण दिवस

June 05, 2017
आज सारी दुनिया विश्व पर्यावरण दिवस मना रही है, अच्छी बात है मनाना भी चाहिए, लेकिन क्या पर्यावरण की फिक्र करने के लिए सिर्फ 24 घंटे काफी है...Read More