Monday, April 24, 2017

ख़्वाब सुनहरा कोई


राह  तकता ही  रहा  ख़्वाब सुनहरा कोई
नींद पे  मेरी लगा  कर  गया  पहरा  कोई

ढूंढती है मेरे एहसास की तितली फिर से
तेरी आँखों  में,  मेरी याद का सहरा कोई

चीखती है मेरी नज़र से ख़ामोशी अब तो
आईना  दे के  मुझे  ले  गया  चेहरा कोई

जो रख दिए हैं कदम, राहे-मोहब्बत में नदीश
फिर जहां लाख सदा दे, नहीं ठहरा कोई

चित्र साभार-गूगल

Monday, April 10, 2017

तनहा रहा है


वफ़ा का फिर सिला धोखा रहा है
बस अपना तो यही किस्सा रहा है

उन्ही जालों में खुद ही फंस गया अब
जिन्हें रिश्तों से दिल बुनता रहा है

समेटूं  जीस्त के सपने नज़र में
मेरा अस्तित्व तो बिखरा रहा है

बुझी आँखों में जुगनू टिमटिमाये
कोई भूला हुआ याद आ रहा है

ख्यालों में तेरे खोया है इतना 
नदीश हर भीड़ में तनहा रहा है