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Showing posts from July, 2017

जिंदगी की तरह

मौसम दिखाई देता है

कहकशां बनाते हैं

छांव बेच आया है-क़तआत

जुगनू से बिखर जाते हैं

बेकल बेबस तन्हा मौसम

देश कहाँ है

जो भी ख़लिश थी दिल में

सीने से लगाये रखना

आदमी से आदमी

मौसम है दिल में

मार देते हैं

औलाद का फर्ज़

अच्छा नहीं लगता