Wednesday, August 16, 2017

प्यार आपका मिले

गुलों की राह के कांटे सभी खफ़ा मिले
मुहब्बत में वफ़ा की ऐसी न सज़ा मिले

अश्क़ तो उसकी यादों के क़रीब होते हैं
तिश्नगी ले चल जहाँ कोई मैक़दा मिले

कहूँ कैसे मैं कि इस शहर-ए-वफ़ा में मुझको
जितने भी मिले लोग सभी बेवफ़ा मिले

राह में रौशनी की, थे सभी हमराह मेरे
अँधेरे बढ़ गए तो साये लापता मिले

आओ तन्हाई में दो-चार बात तो कर लो
महफ़िल में तुम हमें मिले तो क्या मिले

क्या यही हासिल-ए-वफ़ा है, परेशान हूँ मैं
कुछ तो आंसू, ख़लिश ओ दर्द के सिवा मिले

आप पे हो किसी का हक़ तो वो नदीश का हो
और मुझको ही फ़क़त प्यार आपका मिले
चित्र साभार- गूगल

Sunday, August 13, 2017

अधिकार याद रहे कर्तव्य भूल गए

15 अगस्त को भारत वर्ष में स्वतंत्रता दिवस बड़े ही हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाया जाता है। हर्ष इस बात का कि इस दिन हमें आजादी मिली और धूम इस बात की कि अब हम पूरी स्वतत्रंता से अपनी मनमानी कर सकते हैं। गाहे-बगाहे हम स्वतंत्रता की बात करते हुए अपने अधिकारों के लिये लड़ते हैं। जो मन होता है कह देते हैं और जब हमारे कहे का विरोध होता है तब इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार कहते हुए सही ठहराते हैं। हम अपने अधिकारों के लिये पूरी शक्ति से लड़ते हैं और इसका अतिक्रमण होने पर पुरजोर विरोध भी करते हैं, लेकिन अधिकारों की लड़ाई में हम अपने कर्तव्य भूल जाते हैं। ज्ञात रहे कि हमें संविधान ने 6 मौलिक अधिकार दिए हैं, लेकिन हमारे 11 मूल कर्तव्य भी हैं। ये सही है कि हमें अपने अधिकारों के प्रति सजग रहना चाहिए, लेकिन अपने कर्तव्यों को भी नहीं भूलना चाहिये।
संविधान ने हमें जो मौलिक अधिकार दिए गए वो इसलिए ताकि कोई हमारी आज़ादी न छीन सके, हमारा शोषण न कर सके। लेकिन अधिकारों को पाकर हम इतने उन्मुक्त न हों जाएं कि अपने कर्तव्यों को भूल जाएं और इससे हमारे समाज और देश का अपयश हो। हमें संविधान द्वारा मूल रूप से सात मौलिक अधिकार प्रदान किए गए थे, जिसमें समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धर्म, संस्कृति एवं शिक्षा की स्वतंत्रता का अधिकार, संपत्ति का अधिकार तथा संवैधानिक उपचारों का अधिकार। हालांकि, संपत्ति के अधिकार को 44वें संशोधन द्वारा संविधान से हटा दिया गया था।

हमारे 6 मौलिक अधिकार
समानता का अधिकार-
समानता का अधिकार संविधान के प्रमुख अधिकारों में से एक है। जिसमें सामूहिक रूप से कानून के समक्ष समानता तथा गैर-भेदभाव के सामान्य सिद्धांत शामिल हैं तथा सामूहिक रूप से सामाजिक समानता को आगे बढ़ाते हैं। ये अधिकार कानून के समक्ष समानता की गारंटी देता है, इसके साथ ही भारत की सीमाओं के अंदर सभी व्यक्तियों को कानून का समान संरक्षण प्रदान करता है।
स्वतंत्रता का अधिकार-
स्वतंत्रता के अधिकार के तहत छ: प्रकार की स्वतंत्रता को शामिल किया गया है जो सिर्फ भारतीय नागरिकों को ही उपलब्ध हैं। इनमें भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, एकत्र होने की स्वतंत्रता, हथियार रखने की स्वतंत्रता, भारत के राज्यक्षेत्र में कहीं भी आने-जाने की स्वतंत्रतता, भारत के किसी भी भाग में बसने और निवास करने की स्वतंत्रता तथा कोई भी व्यवसाय अपनाने की स्वतंत्रता।
शोषण के खिलाफ अधिकार-
शोषण के विरुद्ध अधिकार, जिसमें राज्य या व्यक्तियों द्वारा समाज के कमजोर वर्गों का शोषण रोकने के लिए कुछ प्रावधान किए गए हैं।
धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार-
धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार जो सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान करता है और भारत में धर्मनिरपेक्ष राज्य सुनिश्चित करता है। संविधान के अनुसार, यहां कोई आधिकारिक राज्य धर्म नहीं है और राज्य द्वारा सभी धर्मों के साथ निष्पक्षता और तटस्थता से व्यवहार किया जाना चाहिए।
सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार-
सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार, उन्हें अपनी विरासत का संरक्षण करने और उसे भेदभाव से बचाने के लिए सक्षम बनाते हुए सांस्कृतिक, भाषाई और धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिये हैं।
संवैधानिक उपचारों का अधिकार-
संवैधानिक उपचारों का अधिकार नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों के अतिक्रमण के विरुद्ध सुरक्षा के लिए भारत के सर्वोच्च न्यायालय में जाने की शक्ति देता है।
हमारे 11 मूल कर्तव्य
1. संविधान का पालन तथा उसके आदर्शों, संस्थाओं और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान-
भारत के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह संविधान का पालन करे और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करे।
2. राष्ट्रीय आन्दोलन के प्रेरक आदर्शों का पालन-
प्रत्येक भारतीय नागरिक का कर्तव्य है कि वह स्वतन्त्रता के लिए हमारे राट्रीय आन्दोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोये रखे और उनका पालन करे।
3. भारत की सम्प्रभुता, एकता और अखण्डता की रक्षा-
प्रत्येक भारतीय नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह भारत की सम्प्रभुता, एकता और अखण्डता की रक्षा करे और उसे अक्षुण्ण बनाये रखे। इसे भारतीय नागरिकों के सर्वोच्च कर्तव्य की संज्ञा दी जा सकती है।
4. देश की रक्षा और राष्ट्र सेवा-
प्रत्येक भारतीय नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह देश की रक्षा करे और बुलाये जाने पर राष्ट्र की सेवा करे।
5. भारत के लोगों में समरसता और भ्रातृत्व की भावना का विकास-
भारत के सभी भागों में समरसता और समान भ्रातृत्व की भावना का विकास करे, जो धर्म, भाषा, प्रदेश या वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से परे हो और ऐसी प्रथाओं का त्याग करे जो स्त्रियों के सम्मान के विरूद्ध हैं।
6. समन्वित संस्कृति की गौरवशाली परम्परा की रक्षा-
हमारी समन्वित संस्कृति की गौरवशाली परम्परा का महत्व समझे और संरक्षण करे।
7. प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सभी प्राणियों के प्रति दया भाव-
प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि प्राकृतिक पर्यावरण की, जिसके अन्तर्गत वन, झील, नदी और वन्य जीव भी हैं रक्षा करे और उनका सम्वर्द्धन करे तथा प्राणी-मात्र के प्रति दयाभाव रखे।
8. वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन का विकास-
प्रत्येक नागरिक की कर्तव्य है कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार का भावना का विकास करे।
9. सार्वजनिक सम्पत्ति की सुरक्षा व हिंसा से दूर रहना-
प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि सार्वजनिक सम्पत्ति को सुरक्षित रखे व हिंसा से दूर रहे।
10. व्यक्तिगत तथा सामूहिक उत्कर्ष का प्रयास-
प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि व्यक्तिगत व सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करे जिससे राष्ट्र निरन्तर बढ़ते हुए प्रगति और उपलब्धि की नवीन ऊंचाइयों को छू सके।
11. जो माता-पिता व संरक्षक हों, वे छः से चौदह वर्ष के बीच की आयु के बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के अवसर प्रदान करे।

Saturday, August 5, 2017

महके है तेरी याद से


तूफ़ान में   कश्ती  को उतारा नहीं होता
उल्फ़त का अगर तेरी किनारा नहीं होता

ये सोचता हूँ, कैसे गुजरती ये ज़िन्दगी
दर्दों का जो है, गर वो सहारा नहीं होता

मेरी किसी भी रात की आती नहीं सुबह
ख़्वाबों को अगर तुमने संवारा नहीं होता

बढ़ती न अगर प्यास ये, आँखों की इस कदर
अश्क़ों को ढलकने का इशारा नहीं होता

महरूम हुए लोग वो लज्ज़त से दर्द की
जिनको भी दर्द-ए-ग़ैर गवारा नहीं होता

उभरे है अक़्स तेरा ख़्यालों में जब मेरे
आँखों में  कोई  और नज़ारा  नहीं होता

महके है तेरी याद से वो पल बहुत नदीश
जो  साथ तेरे  हमने  गुजारा  नहीं  होता

चित्र साभार-गूगल