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ये कैसी तन्हाई है

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ये कैसी तन्हाई है  कि सुनाई पड़ता है ख़्यालों का कोलाहल और सांसों का शोर भाग जाना चाहता हूँ ऐसे बियावां में जहाँ तन्हाई हो और सिर्फ तन्हाई लेकिन नाकाम हो जाती हैं तमाम कोशिशें क्योंकि मैं जब भी निचोड़ता हूँ अपनी तन्हाई को तो टपक पड़ती है कुछ बूंदें तेरी यादों की

चित्र साभार- गूगल

नींद

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【1】
जब भी किया नींद ने
तेरे ख़्वाबों का आलिंगन
और आँखों ने चूमा है
तेरी ख़ुश्बू के लबों को
तब मुस्कुरा उट्ठा है
मेरे ज़िस्म का रोंया रोंया

चित्र साभार- गूगल
【2】 न जाने कितनी ही रातें गुजारी है मैंने तेरे ख़्यालों में उस ख़्वाब के आगोश में जिसकी ताबीर* हो नहीं सकती अक्सर आ बैठते हैं कुछ अश्क़ आँखों की मुंडेरों पर मेरी तन्हाई से बातें करने और तेरे तसव्वुर में खोई आँखें अब चौंक जाती हैं नींद की आहट से
*ताबीर- साकार होना

दो नज़्में

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तुम्हारी
उलझी जुल्फों को
सुलझाते हुए अक्सर,
मन उलझ जाता है
सुलझी हुई जुल्फों में...

चित्र साभार- गूगल
तन्हाई में आकर अचानक तुम्हारी याद जगा देती है उम्मीद तुम्हारे आ जाने की उसी तरह, जिस तरह हवा के साथ आने वाली सोंधी ख़ुश्बू जगा देती है आस बारिश की

आईना

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आईने में देखता हूँ खुद को और मुझे तुम नज़र आते हो सोच में पड़ जाता हूँ क्योंकि  आईना पारदर्शी नहीं होता फिर ये कैसे संभव है सोचता हूँ फिर तुम्हारे प्रेम में कहीं मैं ही तो पारदर्शी नहीं हो गया जब भी देखता हूँ आईना तुम ही नज़र आते हो

चित्र साभार- गूगल

तन्हाई के जंगल

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तन्हाई के जंगल में  भटकते हुए  याद का पल जब भीग जाता है  अश्क़ों की बारिश में  तब एक उम्मीद  चुपके से आकर  पोछ देती है  अश्क़ों की नमी और पहना देती है  इंतज़ार के नये कपड़े
चित्र साभार- गूगल

जब तुम नहीं आते

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अक्सर ही ऐसा होता है उम्मीदों की उंगली थामे दिल चल पड़ता है तमन्ना की पथरीली राहों में और चुभता है फिर किसी की बेरुख़ी का कांटा फिर लहूलुहान दिल लौट पड़ता है दर्द के दरख्त की तरफ अक्सर ही ऐसा होता है

मन अकुला जाता है जब तुम नहीं आते एक टीस सी उठती है हृदय में  जैसे आ गया हूँ मैं प्रलय में  आतुर हो नयन भटकते हैं  अश्रु पलकों पर मचलते हैं  ऋतु-रंग कुछ नहीं सुहाते मन अकुला जाता है जब तुम नहीं आते...

घर बनाने में

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न तारे, चाँद, गुलशन औ' अम्बर बनाने में जरूरी जिस कदर है सावधानी घर बनाने में
अचानक अश्क़ टपके और बच गई आबरू वरना कसर छोड़ी न थी उसने मुझे पत्थर बनाने में
मैं सारी उम्र जिनके वास्ते चुन-चुन के लाया गुल वो ही मसरूफ़ थे मेरे लिए खंज़र बनाने में
चित्र साभार- गूगल