ज़िस्म की खराश देखकर


ख़्वाबे-वफ़ा के ज़िस्म की खराश देखकर
इन आँसुओं की बिखरी हुई लाश देखकर
जब से चला हूँ मैं कहीं ठहरा न एक पल
राहें भी रो पड़ीं मेरी तलाश देखकर


Popular posts from this blog

नींद का बिस्तर नहीं मिला

देखते देखते

प्यार करें

महके है तेरी याद से

ठंडी हवा की आँच

कितना मुश्किल रहा है वो

सैकड़ों खानों में

घटा से धूप से और चांदनी से चाहते क्या हो?

प्यार आपका मिले

दिल की हर बात