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Showing posts from August, 2012

सैकड़ों खानों में

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सैकड़ों खानों में जैसे बंट गयी है ज़िन्दगी साथ रहकर भी लगे है अज़नबी है ज़िन्दगी
झांकता हूँ आईने में जब भी मैं एहसास के यूँ लगे है मुझको जैसे कि नयी है ज़िन्दगी
न तो मिलने कि ख़ुशी है न बिछड़ जाने का ग़म हाय ये किस मोड़ पे आकर रुकी है ज़िन्दगी
सीख ले अब लम्हें-लम्हें को ही जीने का हुनर कौन जाने और अब कितनी बची है ज़िन्दगी
वस्ल भी है, प्यार भी है, प्यास भी है जाम भी फिर भी जाने क्यों लगे है अनमनी है ज़िन्दगी
अब कहाँ तन्हाई ओ' तन्हाई का साया नदीश उसके ख़्वाबों और ख़्यालों से सजी है ज़िन्दगी
चित्र साभार : गूगल

मिरे वज़ूद को दिल का जो घर दिया तूने

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मिरे वज़ूद को दिल का जो घर दिया तूने इश्क़ की राह को आसान कर दिया तूने
ख़लिश मैं ओस की महसूस करूं फूलों में दिल के एहसास को कैसा असर दिया तूने
रहेगी याद ये सौग़ात उम्र भर तेरी सिर्फ़ आंसू ही सही कुछ मगर दिया तूने
न कोई नक्स-ए-पा है न कोई मंजिल के निशां मेरी हयात को ये रहगुज़र दिया तूने
ख़ुद अपने घर में ही मेहमान हो गया है 'नदीश' मेरे एहसास को ऐसा सफ़र दिया तूने

चित्र साभार : गूगल