Posts

Showing posts from March, 2017

कितना मुश्किल रहा है वो

Image
खोया है कितना, कितना हासिल रहा है वो अब सोचता हूँ कितना मुश्किल रहा है वो
जिसने अता किये हैं ग़म ज़िन्दगी के मुझको खुशियों में मेरी हरदम शामिल रहा है वो
क्या फैसला करेगा निर्दोष के वो हक़ में मुंसिफ बना है मेरा कातिल रहा है वो
पहुँचेगा हकीकत तक दीदार कब सनम का सपनों के मुसाफिर की मंज़िल रहा है वो
कैसे यक़ीन उसको हो दिल के टूटने का शीशे की तिज़ारत में शामिल रहा है वो
तूफां में घिर गया हूँ मैं दूर होके उससे  कश्ती का ज़िन्दगी की साहिल रहा है वो
ता उम्र समझता था जिसको नदीश अपना गैरों की तरह आकर ही  मिल रहा वो चित्र साभार-गूगल

हुए गुम क्यूँ

जो आँखों से आंसू झरे, देख लेते
नज़र इक मुझे भी  अरे, देख लेते
हुए गुम क्यूँ आभासी रंगीनियों में
मुहब्बत,  बदन  से  परे, देख लेते



संवरती रही ग़ज़ल

Image
जब भी मेरे ज़ेह्न में संवरती रही ग़ज़ल 
तेरे ही ख़्यालों से महकती रही ग़ज़ल

झरते रहे हैं अश्क़ भी आँखों से दर्द की 

और उँगलियां एहसास की लिखती रही ग़ज़ल

तस्वीर भेजी है

ख़िल्वत की पोशीदा पीर भेजी है
तुमको ख़्वाबों की ताबीर भेजी है रंग मुहब्बत का थोड़ा सा भर देना यादों की बेरंग कुछ तस्वीर भेजी है

ज़िन्दगी का मौसम

Image
उदास-उदास सा है ज़िन्दगी का मौसम

नहीं आया हुई मुद्दत खुशी का मौसम

दिल कॊ बेचैन किये रहता है नदीश सदा

याद रह जाता है कभी-कभी का मौसम

बेताब दिल की

Image
सांसों की फिसलती हुई ये डोर थामकर

बेताब दिल की घड़कनों का शोर थामकर

करता हूँ इंतज़ार इसी आस में कि तुम

आओगी कभी तीरगी में भोर थामकर

विश्वास रहने दो

Image
★■★■★ लब पे लबों की छुअन का एहसास रहने दो
बस एक पल तो खुद को , मेरे पास रहने दो ।
ये तय है तुम भी छोड़ के जाओगे एक दिन
लेकिन कहीं तो झूठा ही विश्वास रहने दो ।। ★■★■★

आँख में ठहरा हुआ

Image
वस्ल की शब का है मंज़र आँख में ठहरा हुआ एक सन्नाटा है सारे शहर में फैला हुआ
दोस्ती-ओ-प्यार की बातें जो की मैंने यहाँ किस कदर जज़्बात का फिर मेरे तमाशा हुआ
क्यों मैं समझा था सभी मेरे हैं औ' सबका हूँ मैं सोचता हूँ जाल में रिश्तों के अब उलझा हुआ

फुसफुसा कर क्या कहा जाने ख़ुशी से दर्द ने आंसुओं के ज़िस्म का हर ज़ख्म है सहमा हुआ
रिस रही थी दर्द की बूंदें भी लफ़्ज़ों से नदीश घर मेरे अहसास का था इस कदर भीगा हुआ

शायरी के लिये

Image
नज़र को आस नज़र की है मैकशी के लिये तड़प रहे हैं बहुत आज हम किसी के लिये
नहीं लगता है ये मुमकिन मुझे सफ़र तनहा हमसफ़र चाहिये मुझको भी ज़िन्दगी के लिये
गाँव में यादों के छाई है जो सावन की घटा बरस ही जाये तो अच्छा है तिश्नगी के लिये

धूप रख के भी अंधेरों से वफ़ा की हमने आज दिल भी जलाएंगे रौशनी के लिये
ढले तो आँख से आंसू, मगर ग़ज़ल की तरह उम्र नदीश की गुजरे तो शायरी के लिये
चित्र साभार-गूगल

सीने में छिपाये रक्खा

दिल की उम्मीदों को सीने में छिपाये रक्खा इन चिराग़ों को हवाओं से बचाये रक्खा
तेरे ख़्याल ने दिन भर मुझे सताया है हुई जो रात तो ख़्वाबों ने जगाये रक्खा
हमसे मायूस होके लौट गई तन्हाई भी हमने खुद को तेरी यादों में डुबाये रक्खा
उमड़ पड़ा है ये तूफ़ान देखकर तुमको मुद्दतों से जिसे इस दिल में दबाये रक्खा
रही बिखेरती ख़ुश्बू नदीश की ग़ज़लें एक-एक हर्फ़ ने अहसास बनाये रक्खा