नींद



【1】
जब भी किया नींद ने
तेरे ख़्वाबों का आलिंगन
और आँखों ने चूमा है
तेरी ख़ुश्बू के लबों को
तब मुस्कुरा उट्ठा है
मेरे ज़िस्म का रोंया रोंया

चित्र साभार- गूगल

【2】
न जाने
कितनी ही रातें गुजारी है मैंने
तेरे ख़्यालों में
उस ख़्वाब के आगोश में
जिसकी ताबीर* हो नहीं सकती
अक्सर आ बैठते हैं कुछ अश्क़
आँखों की मुंडेरों पर
मेरी तन्हाई से बातें करने
और तेरे तसव्वुर में खोई आँखें
अब चौंक जाती हैं
नींद की आहट से

*ताबीर- साकार होना

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