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Showing posts from August, 2017

ज़िन्दगी मुस्कुरा दी

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साँसों ने चाहा ओ' दिल ने दुआ दी मिला साथ तेरा ज़िन्दगी मुस्कुरा दी
सोचा था भुलाऊंगा यादों को तेरी मगर याद ने सारी दुनिया भुला दी
ग़ज़ब कर दिया मेरे एहसास ने भी मुहब्बत को तन्हाइयों की सज़ा दी
वही कह रहे हैं मुझे बेवफ़ा अब जिन्हें तोहफ़े में हम ही ने वफ़ा दी
उसकी आरज़ू में नदीश हमने अपनी उम्र ये सारी तन्हा तन्हा बिता दी

सौग़ात हो गई

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पल भर तुमसे बात हो गई
ख़ुशियों की सौग़ात हो गई

दुश्मन है इन्सां का इन्सां
कैसी उसकी जात हो गई

आँखों में है एक कहकशां
अश्कों की बारात हो गई

वक़्त, वक़्त ने दिया ही नहीं
बातें  अकस्मात  हो  गई

जख़्म मिले ता-उम्र जो नदीश
रिश्तों  की  सौग़ात  हो गई


चित्र साभार-गूगल

सोया हुआ ज्वालामुखी

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हलचल सी मची है
उम्मीदों की बस्ती में
गिरने लगे हैं
तमन्ना के झुलसे हुये शजर 
कुछ ही देर में ढाँक लेगा
अहसास के आसमां को
पिघले हुये ख़्वाबों का
लावा और गुबार
क्योंकि 
आँखों में फूट पड़ा है
वादी-ए-ख़्वाब में
सोया हुआ ज्वालामुखी...
चित्र साभार-गूगल

न सोई आँखें

ख़्वाब जिसके तमाम उम्र संजोई आँखें
उसकी यादों ने आंसुओं से भिगोई आँखें

तेरे ख़्वाबों की हर एक वादा खिलाफी की कसम
मुद्दतें हो गई है फिर भी न सोई आँखें

जिक्र छेड़ो न अभी यार तुम जमाने का
हुस्न के ख़्वाबों-ख्यालों में है खोई आँखें

फूल में याद के बिखरी हुई है शबनम सी
रात भर यूँ लगे है जैसे कि रोई आँखें

हाले-दिल कह न सके हम भी और नदीश यहाँ
मेरी आँखों को भी न पढ़ सकी कोई आँखें

लम्हा-ए-विसाल था

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शबे-वस्ल तेरी हया का कमाल था  सुबह देखा तो आसमां भी लाल था 
 कटे हैं यूँ हर पल ज़िन्दगी के अपने  नफ़स नफ़स में वो कितना बवाल था  
जवाब देते अहले-जहां को, तो क्या  तुझी से बावस्ता हर एक सवाल था 
 चमकता है जो मेरी आँखों में अब भी  वो रूहानी पल जो लम्हा-ए-विसाल था 
 कटे ज़िन्दगी इस तरह कि कहें सब  नदीश सच में जैसा भी था बस कमाल था

चित्र साभार-गूगल

प्यार आपका मिले

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गुलों की राह के कांटे सभी खफ़ा मिले मुहब्बत में वफ़ा की ऐसी न सज़ा मिले
अश्क़ तो उसकी यादों के क़रीब होते हैं तिश्नगी ले चल जहाँ कोई मैक़दा मिले
कहूँ कैसे मैं कि इस शहर-ए-वफ़ा में मुझको जितने भी मिले लोग सभी बेवफ़ा मिले
राह में रौशनी की, थे सभी हमराह मेरे अँधेरे बढ़ गए तो साये लापता मिले
आओ तन्हाई में दो-चार बात तो कर लो महफ़िल में तुम हमें मिले तो क्या मिले
क्या यही हासिल-ए-वफ़ा है, परेशान हूँ मैं कुछ तो आंसू, ख़लिश ओ दर्द के सिवा मिले
आप पे हो किसी का हक़ तो वो नदीश का हो और मुझको ही फ़क़त प्यार आपका मिले चित्र साभार- गूगल

अधिकार याद रहे कर्तव्य भूल गए

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15 अगस्त को भारत वर्ष में स्वतंत्रता दिवस बड़े ही हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाया जाता है। हर्ष इस बात का कि इस दिन हमें आजादी मिली और धूम इस बात की कि अब हम पूरी स्वतत्रंता से अपनी मनमानी कर सकते हैं। गाहे-बगाहे हम स्वतंत्रता की बात करते हुए अपने अधिकारों के लिये लड़ते हैं। जो मन होता है कह देते हैं और जब हमारे कहे का विरोध होता है तब इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार कहते हुए सही ठहराते हैं। हम अपने अधिकारों के लिये पूरी शक्ति से लड़ते हैं और इसका अतिक्रमण होने पर पुरजोर विरोध भी करते हैं, लेकिन अधिकारों की लड़ाई में हम अपने कर्तव्य भूल जाते हैं। ज्ञात रहे कि हमें संविधान ने 6 मौलिक अधिकार दिए हैं, लेकिन हमारे 11 मूल कर्तव्य भी हैं। ये सही है कि हमें अपने अधिकारों के प्रति सजग रहना चाहिए, लेकिन अपने कर्तव्यों को भी नहीं भूलना चाहिये।
संविधान ने हमें जो मौलिक अधिकार दिए गए वो इसलिए ताकि कोई हमारी आज़ादी न छीन सके, हमारा शोषण न कर सके। लेकिन अधिकारों को पाकर हम इतने उन्मुक्त न हों जाएं कि अपने कर्तव्यों को भूल जाएं और इससे हमारे समाज और देश का अपयश हो। हमें संविधान द्वारा मूल रूप से सा…

महके है तेरी याद से

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तूफ़ान में   कश्ती  को उतारा नहीं होता उल्फ़त का अगर तेरी किनारा नहीं होता
ये सोचता हूँ, कैसे गुजरती ये ज़िन्दगी दर्दों का जो है, गर वो सहारा नहीं होता
मेरी किसी भी रात की आती नहीं सुबह ख़्वाबों को अगर तुमने संवारा नहीं होता
बढ़ती न अगर प्यास ये, आँखों की इस कदर अश्क़ों को ढलकने का इशारा नहीं होता
महरूम हुए लोग वो लज्ज़त से दर्द की जिनको भी दर्द-ए-ग़ैर गवारा नहीं होता
उभरे है अक़्स तेरा ख़्यालों में जब मेरे आँखों में  कोई  और नज़ारा  नहीं होता
महके है तेरी याद से वो पल बहुत नदीश जो  साथ तेरे  हमने  गुजारा  नहीं  होता
चित्र साभार-गूगल