हर शाम ग़मगीं सी
हर सुबह उनींदी सी
हर ख़्याल खोया सा
इक तेरे जाने के बाद
हर वक़्त बिखरा सा
हर अश्क़ दहका सा
एहसास भिगोया सा
इक तेरे जाने के बाद
हर दर्द महका सा
हर वक़्त तन्हा सा
हर ख़्वाब रोया सा
इक तेरे जाने के बाद
हर सांस चुभती सी
हर बात कड़वी सी
हर नाम ढ़ोया सा
इक तेरे जाने के बाद
अक्सर शब्द बिखर जाते हैं कोशिश बहुत करता हूँ, कि शब्दों को समेट कर कोई कविता लिखूं पर ये हो नहीं पाता कोशिश बहुत करता हूँ कि एहसास समेट कर रखूं पर ये हो नहीं पाता तकिये पर बिखरे अश्क़ों की तरह अक्सर शब्द बिखर जाते हैं