Saturday, July 8, 2017

मौसम है दिल में

वीरानियों का वो आलम है दिल में
मर्ग़-ए-तमन्ना का मातम है दिल में

ठहरा हुआ है अश्कों का बादल
सदियों से बस एक मौसम है दिल में



धुंधला रही है तस्वीर-ए-ख़्वाहिश
उम्मीदों का हर सफ़ह नम है दिल में

मुझको पुकारा है तूने यक़ीनन
ये दर्द शायद तभी कम है दिल में

हंसकर हंसी ने, हंसी में ये पूछा
बताओ नदीश क्या कोई ग़म है दिल में