Thursday, July 20, 2017

बेकल बेबस तन्हा मौसम



बिखरी शाम सिसकता मौसम
बेकल बेबस तन्हा मौसम

तन्हाई को समझ रहा है
लेकर चाँद खिसकता मौसम

शब के आंसू चुनने आया
लेकर धूप सुनहरा मौसम

चाँद चौदहवीं का हो छत पर
फिर देखो मचलता मौसम

जुल्फ चांदनी की बिखराकर
बनकर रात महकता मौसम

खिलती कलियों की संगत में
फूलों सा ये खिलता मौसम

तेरी यादों की बूंदों से
ठंडा हुआ दहकता मौसम

धूप-छांव बनकर नदीश की
ग़ज़लों में है ढलता मौसम