Friday, June 9, 2017

मगर चाहता हूँ

मुहब्बत में अपनी असर चाहता हूँ
वफ़ा से भरी हो नज़र, चाहता हूँ

तेरा दिल है मंज़िल मेरी चाहतों की
नज़र की तेरी रहगुज़र चाहता हूँ

कभी बांटकर मेरी तन्हाईयों को
अगर जान लो किस कदर चाहता हूँ

वफ़ा दौर-ए-हाज़िर में किसको मिली है
मेरे दोस्त तुझसे मगर चाहता हूँ

सफ़र में तुझी को नदीश जिंदगी के
मैं अपने लिये हमसफ़र चाहता हूँ