पतझड़ के बाद की बहार

क्या हुआ इतना परेशान क्यों हो?
अरे कुछ नहीं अरु, वो मेरा दोस्त है न प्रकाश उसकी बेटी ...
क्या हुआ उसको?
अरे हुआ कुछ नहीं, वो किसी लड़के को पसंद करती थी और दो दिन पहले ही उसने घर में किसी को बताए बिना मंदिर में शादी कर ली।
ओह्ह, ये तो बहुत बुरा हुआ, ये आजकल के बच्चे भी न, माँ बाप की बिल्कुल फिक्र नहीं है इनको। ऐसे मामलों में संबंध भी बिगड़ते हैं और घर की इज्ज़त भी जाती रहती है।
हाँ सच कहा लेकिन क्या करें अरु, आजकल के बच्चे पढ़ लिख कर खुद को इतना समझदार समझने लगते हैं, ज़िन्दगी के बड़े फैसलों में भी माँ-बाप से सलाह नहीं लेते।
हाँ सच कहा विनय तुमने।
अरे अब तुम क्यों उदास हो, विनय ने अरु से पूछा
हमारी भी बेटी है, पता नहीं क्या होगा बड़ा खराब समय चल रहा है। मुझे तो बहुत चिंता हो रही है, सुनो मनु की पढ़ाई पूरी होते ही उसकी शादी कर देंगे। हाँ अभी से अच्छा सा लड़का देखना शुरू कर दो।
अरे तुम तो बेकार परेशान हो रही हो, विनय ने अरु का हाथ पकड़ते हुए कहा। ज्यादा सोचना सेहत के लिए खराब है,  वैसे हमारी मनु बहुत समझदार है, अच्छा अब मेरे लिए एक कप चाय बना दो।
अरु के जाते ही विनय भी सोचने लगा, आखिर अरु ठीक ही कह रही है, आजकल के बच्चे जवानी की दहलीज पे पहुंचते ही खुद को समझदार समझ लेते हैं और अक्सर बड़ी गलतियां कर देते हैं। खैर उसने खुद को तसल्ली दी कि उसकी बेटी ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी। इतने में अरु चाय लेकर आ गई और वो चाय पीने लगा, लेकिन उसके दिमाग में यही उधेड़बुन चल रही थी।
दूसरे दिन विनय ऑफिस जाने के लिए घर से निकल ही रहा था कि पीछे से मनु ने आवाज़ दी.. पापा मुझे आपसे कुछ जरूरी बात करनी है,
हाँ बेटा बोलो, विनय ने कहा
पापा लेकिन, इतना कहकर मनु रुक गई
क्या हुआ घबराओ नहीं, विनय ने कहा
वो पापा मैं...
ऐसी क्या बात है मनु की तुम कह नहीं पा रही हो। पहले तो कभी ऐसा नहीं हुआ, जरूर कोई गंभीर बात है.. विनय ने थोड़ा सख़्त लहज़े में कहा।
पापा का सख़्त लहज़ा समझते ही मनु रोने लगी
मनु को रोता देख विनय ने थोड़ी नरमी दिखाते हुए कहा अरे क्या हुआ बेटू, रोना बंद करो और जो कहना है बेझिझक कहो अपने पापा से
जी पापा
लेकिन मनु चुप रही
मनु को चुप देखकर विनय समझ गया कि मामला कुछ गड़बड़ है, उसने तुरंत आफिस फ़ोन लगा कर छुट्टी ले ली।
आफिस फोन करने के बाद उसने मनु से कहा, देखो बेटा मैं ये तो समझ रहा हूँ कि कोई बड़ी बात है, अन्यथा तुम बात कहने में इतना नहीं डरती
फिर उसने कहा क्या हुआ क्या रिजल्ट बिगड़ने का डर है...
नहीं पापा, मनु ने जवाब दिया
इतने में अरु भी वहां आकर बैठ गई और मनु से पूछा तो क्या बात है खुलकर कहो...
मम्मी-पापा को सामने देखकर मनु थोड़ा डर रही थी, लेकिन हिम्मत करते हुए उसने कह ही दिया..पापा वो मैं एक लड़के से...
इससे पहले मनु पूरी बात कहती अरु डांटते हुए बोल पड़ी तो कॉलेज में यही करने जाती हो, हमारी इज्ज़त का कोई ध्यान ही नहीं है...
अरु कुछ और कहती विनय ने उसे रोक दिया और मनु से कहा देखो बेटा हमें तुम्हारी पसंद से कोई एतराज नहीं है लेकिन तुम पहले अपनी पढ़ाई पूरी कर लो और हां उस लड़के को कभी घर बुलाओ। अच्छा वैसे क्या नाम है उसका
जी पापा आर्ष, मनु ने जवाब दिया
ओके, अब तुम जाओ और अपनी पढ़ाई पे ध्यान दो।
मनु के जाते ही अरु ने विनय से कहा अब क्या होगा और आपने भी उसे नहीं डाँटा
विनय ने सहजता से जवाब दिया देखो ये नई उम्र के बच्चें हैं इन्हें कैसे समझाना है मुझे पता है, सख़्ती करने का परिणाम और बुरा हो सकता है। वैसे हमें मनु की शादी करना ही है, अगर लड़का और उसके घर वाले भले हुए तो सोचेंगे।
लेकिन अरु ने संदेह की दृष्टि से विनय को देखा.
देखो अरु समय बदल चुका है, अब हमारा समय नहीं रहा, ये कहते हुए विनय अपने कमरे में चला गया।
एक हफ्ते बाद रविवार के दिन...
पापा आज मैंने आर्ष को लंच पे बुलाया है
अच्छा, तभी तुम आज सुबह से किचन में हो, विनय ने मजाकिया लहज़े में कहा
पापा से ऐसा सुनते ही मनु थोड़ा शरमा गई और तुरंत सामान्य होते हुए कहा पापा वो आपसे मिलना चाहता है
ठीक है अच्छा किया हम भी उससे मिलना चाहते हैं
ठीक 12 बजे डोर वेल बजी तो मनु ने दौड़कर दरवाज़ा खोला, सामने आर्ष ही था।
अंदर आते ही आर्ष ने विनय के पांव छुए और सामने बैठ गया
कब से और कैसे जानते हो एक दूसरे को...आर्ष के बैठते ही विनय ने पूछा
अचानक सवाल पूछने से आर्ष हकबका गया
ये देख विनय मुस्कुरा दिया फिर थोड़ा संकोच के बाद बोला
जी तीन साल से जानता हूँ
अच्छा, कहाँ मिले थे तुम लोग विनय ने फिर पूछा
जी वो मेन मार्केट वाली सड़क पे
विनय को ऐसे जवाब की उम्मीद नहीं थी विनय को लगा दोनों कॉलेज में साथ पढ़ते होंगे इसलिये उसने दोनों को आश्चर्य से देखा आर्ष ने कहा
वो क्या है न अंकल तीन साल पहले मनु और मेरी गाड़ी आपस में टकरा गई और मेरे हाथ की हड्डी क्रेक हो गई थी, जिसके बाद मनु मुझे एक दो बार घर देखने आई, बस तबसे हमें लगा कि हम एक दूसरे को पसंद करने लगे हैं और अब शादी करना चाहते हैं, आर्ष एक सांस में बोल गया।
इतने में अरु ने सबको खाने के लिये आवाज़ दी।
खाना खाने के बाद विनय ने पूछा
क्या करते हो आर्ष, आर्ष ने कहा अंकल छोटा सा व्यापार है उसमें पापा का हाथ बटाता हूँ।
किस चीज़ का व्यापार है, विनय ने कहा
जी आयर्वेदिक दवा बनाने का, आर्ष ने जवाब दिया
विनय ने फिर आश्चर्य से देखा और पूछा किस नाम से
आर्ष ने सहजता से जवाब दिया जी धनवंतरि आयुर्वेद के नाम से
इतना सुनते ही विनय एकदम चौंक गया
तुम आयुर्वेदाचार्य जी के बेटे हो
हाँ अंकल आर्ष ने जवाब दिया
लेकिन बेटा अब विनय का लहज़ा बहुत ही नरमी वाला था, तुम्हारे पिता क्या इस रिश्ते के लिये तैयार होंगे
कहाँ आप लोग और कहाँ हम
जी जरूर होंगे आर्ष ने कहा
लेकिन अब विनय को कुछ नहीं सूझा कि वो क्या कहे,
विनय की स्थिति भांपकर आर्ष ने कहा देखिए आप परेशान न होइए और वो चला गया।
उसके जाते ही विनय ने खुद को संयत किया और मनु से कहा देखो बेटा आर्ष अच्छा लड़का है लेकिन हम दोनों परिवारों के बीच जो एक बड़ा अंतर है उसे सहजता से न लेना। तुम भी समझदार हो, शादी के बाद जीवन दुश्वार हो इससे अच्छा है कोई हमारे स्तर का परिवार देखा जाए और तुम्हारी शादी कर दी जाए
विनय की बात सुनकर मनु उदास हो गई, लेकिन फिर कहा
पापा लेकिन इतनी सारी लव मैरिज होती हैं, उनमे तो ये सब नहीं देखा जाता...
मनु की बात सुनकर विनय ने कहा हां बेटा हमारे देश मे हज़ारो की संख्या में लव मैरिज होती हैं, लेकिन इसमें निभती सिर्फ कुछ सैकड़ा ही हैं। जानती हो क्यों
मनु ने न में जवाब दिया
विनय ने कहा अक्सर ये होता है कि युवा जिसे प्यार समझते हैं वो प्यार नहीं महज आकर्षण होता है, लेकिन उम्र का प्रभाव ऐसा होता है कि उस समय कुछ नहीं सूझता। न लड़का और न लड़की इस बात को समझते हैं, उन्हें तो बस शादी की पड़ी रहती है, घर वालो की सलाह नहीं लेते, अगर सलाह लेने के बाद घर वाले मना कर दें तो वो भी दुश्मन हो जाते हैं और ऐसे भावावेश में घर से भागकर और घर में बिना बताए ही शादी कर लेते हैं। जवान लड़के पहले खुद को स्थापित करने की बजाए उस आकर्षण जिसे वे प्यार समझते हैं, उसके पीछे भागते हैं, शादी करते हैं और फिर 6-8 महीनों में ही तलाक की नौबत आ जाती है। कारण होता है लड़के का निकम्मा होना और शादी के बाद आपसी सामंजस्य की कमी, दोनों परिवारों का आर्थिक स्तर समान न होना जैसे कई कारण होते हैं जिससे ये शादी टूट जाती है।
लेकिन पापा ये तो अरेंज मैरिज में भी हो सकता है, मनु ने पूछा
विनय ने कहा हाँ बिल्कुल होता भी है, लेकिन इसकी संख्या नगण्य है, क्योंकि यहां परिवार, समाज साथ होता है, विपरीत परिस्थितियों में आर्थिक व सामाजिक सहयोग भी मिलता, इसलिये ऐसे मामले कम होते हैं।
एक बात और सच्चा प्यार जो आजकल के युवा जानते ही नहीं, प्यार पाने में नहीं त्याग में निहित है। सच्चा प्यार कभी भी अपने प्रेम को संकट और विपदा में नहीं जाने देगा। अब तुम कहो जो जीवन भर साथ न निभा सके क्या वो सच्चा प्यार है, जो अपने प्रेम के लिये त्याग न कर सके क्या वो प्यार है।
मनु चुप रही, लेकिन वो सोच रही थी क्या उसकी शादी अरेंज नहीं हो सकती। उसने पापा को कोई जवाब नही दिया और वहां से उठ के चली गई
क्रमशः...

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