पर्यावरण दिवस

आज सारी दुनिया विश्व पर्यावरण दिवस मना रही है, अच्छी बात है मनाना भी चाहिए, लेकिन क्या पर्यावरण की फिक्र करने के लिए सिर्फ 24 घंटे काफी हैं। आप सब भी समझते हैं कि नहीं है, हमें अपनी हर सांस के साथ पर्यावरण की चिंता होनी चाहिए, क्योंकि हम सांसों के माध्यम से जो आक्सीजन अपने शरीर में भर रहे हैं, वो पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हमें पानी पीते समय पर्यावरण की चिंता करनी चाहिए, क्योंकि हम जो पानी पी रहे हैं वो भी पर्यावरण का हिस्सा है। हमें सुंदर प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेते समय पर्यावरण की चिंता करनी चाहिए, क्योंकि ये सब भी पर्यावरण का हिस्सा है, यानि की हमें हर पल पर्यावरण की चिंता करनी चाहिए। 

पर्यावरण यानि पर्या जो हमारे चारों ओर है और आवरण जो हमें चारों ओर से घेरे हुये है। इसका सीधा मतलब है कि हम जिस आवरण से जन्म से लेकर मृत्युपर्यंत तक घिरे रहते हैं और इसका प्रत्येक अंश हमारे लिए जीवनोपयोगी है, फिर भी हम उसे नुकसान पहुंचाने में जरा भी संकोच नहीं करते। हम ये तो नहीं सोचते कि हम प्रकृति के जिन अंशों को क्षति पहुंचा रहे हैं, उनके न होने पर हमारी मृत्यु निश्चित है, लेकिन क्या करें हमारी मानसिकता सिर्फ अपने सुख तक सीमित है और स्वयं के लाभ से ज्यादा हमारा दिमाग कुछ नहीं सोचता। जब भी कोई ऐसी आपदा आती है तो हम अपने कर्तव्यों को नजरअंदाज शासन व समाज को कोसने लगते हैं, लेकिन ये नहीं सोचते कि हमने अब तक अपने अलावा शासन व समाज के लिए क्या किया, अपने पर्यावरण के लिए क्या किया। अभी भी समय है अगर हम अभी नहीं चेते तो हमारा और इस धरा का अंत निश्चित है, इसलिए ऐसा करें कि हमारा हर दिन पर्यावरण दिवस हो।

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