Thursday, June 15, 2017

बेक़रार बहुत थे

रस्ते तो ज़िन्दगी के साज़गार बहुत थे
ख़ुशियों को मगर हम ही नागवार बहुत थे

बिखरे हुये थे चार सू मंज़र बहार के
बिन तेरे यूँ लगा वो सोगवार बहुत थे

ये जान कर भी अहले-जहां में वफ़ा नहीं
दुनिया की मोहब्बत में गिरफ़्तार बहुत थे

 थी नींद क़ैद आंसुओं की ज़द में रात भर
आँखों में चंद ख़्वाब बेक़रार बहुत थे

झुलसे मेरी वफ़ा के पांव आख़िरश नदीश
या रब तेरे यक़ीन में शरार बहुत थे
चित्र साभार- गूगल